शादी के वीडियो में अब बिना इजाजत नहीं लगा सकते फिल्मीं गानें

शादी हो या बर्थडे पार्टी, सब अपने जिंदगी के खुबसूरत पल को सहेजने के लिए वीडियो रिर्काडिंग जरुर कराते है. इन वीडियो में हर रस्मों को ओर खुबसूरत बनाने के लिए फिल्मीं गानें डालना एक आम बात है. मगर, अब फिल्मीं गानों का किसी वीडियो में इस्तेमाल करने से पहले म्यूजिक कंपनी से इजाजत नही ली, तो किसी भी वीडियोग्राफर के लिए यह महंगा पर सकता है.

दरअसल, म्यूजिक कंपनियों ने अपने गानों का बिना इजाजत इस्तेमाल करने पर कारवाई शुरु कर दी है. हाल ही में, 13 फरवरी को आगरा में अजय को टी-सीरीज कंपनी की शिकायत पर क़पीराइट एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया. टी-सीरीज की तरफ से दर्ज एफआइआर के मुताबिक, अजय ने कंपनी के गानों का इस्तेमाल अपनी वीडियो के बैकग्राउंड व मिक्सिंग में किया, जिसकी उसने कंपनी से इजाजत नही ली थी.

इस मामले के वकील सुब्रत मेहरा का कहना है कि, अगर किसी कंपनी के पास कॉपीराइट है और वह रजिस्ट्रेशन दिखाती है, तो वह बिना अनुमति अपने गानों के प्रयोग करने पर कॉपीराइट की धारा 63 के तहत कार्रवाई कर सकती है.

आगरा फोटोग्राफी एंड फिल्म एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विशाल तिवारी के मुताबिक, एक म्यूजिक कंपनी फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर से गानों का इस्तेमाल करने के लिए एक साल के लाइसेंस के लिए 15,000 रुपये लेने की बात कह रही है. अगर हम एक कंपनी को यह फीस देते है, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसा करेगी. ऐसे में हमारा काम करना मुश्किल हो जाएगा.

कुछ वर्ष पहले भी आया था ऐसा मामला

कुछ वर्ष पहले भी इसी तरह का मामला बैंगलुरु में हुआ था. बैंगलुरु पुलिस ने दाश के इंटरनेट सर्च इंजन ‘गुरुजी डॉट कॉम’ के दफितर पर छापा मार कर कई कंप्यूटर कब्जे में ले लिया था. कंपनी के कई अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया था. यह कार्रवाई पुलिस ने टी-सीरीज द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की थी.

एफआईआर में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, “‘गुरुजी डॉट कॉम’ पर कॉपीरीईट का उल्लघंन का आरोप लगाया गया था. इस कंपनी ने गानों के लिए सर्च इंजन बनाया था, जो किसी भी गाने को फौरन तलाश कर सकता था. इसके साथ ही कोई भी उपयोगक्रता इस सर्च इंजन पर उस गाने को सुनने के साथ-साथ डाउनलोड कर अपने कंप्यूटर में सेव कर सकता था. साथ ही इसका भी इस्तेमाल सकता था.”

क्या है कॉपीराइट एक्ट

कॉपीरइट एक्ट की धारा 63 के मुताबिक इसका मूलत: हक रचनाकार का होता है. इस एक्ट के मुताबिक कोई भी शख्स किसी रचना का इस्तोमाल रचनाकार के इजाजत बिना या कॉपीराइट पंजीयक से लाइसेंस प्राप्त किए बिना करता है, तो यह कॉपीराइट एक्ट का उल्लघंन होता है. इस एक्ट में आरोप साबित होने पर अभियुक्त को जुर्माने के साथ तीन साल तक की जेल तक हो सकती है. इसके साथ ही किसी रचना की प्रतियां लोगों में बांटना, उसका सार्वजनिक प्रदर्शन या प्रचार करना, उस रचना के संबंध में फिल्म बनाना, उसे दिखाना कॉपीरइट के दायरे में आता है.

पब्लिक व्यू डेस्क

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