AURIYA

औरैया हादसा: प्रशासन का दिखा अमानवीय व्यवहार, ट्रक में मजदूरों के शवों के साथ घायलों को बिठाकर भेजा झारखंड

औरेया में शुक्रवार रात ट्राला और डीसीएम की टक्कर में मारे गए 26 मजदूरों और 42 घायलों के साथ किए गए व्यवहार से यूपी सरकार का अमानवीय चेहरा सामने ला दिया. रविवार सुबह औरेया प्रशासन ने झारखंड के 12 मजदूरों के शवों को तीन डीसीएम में भिजवाया तो, लेकिन वाजिब इंतजाम के बिना. 40 डिग्री सेल्सियस की तपिश के बीच काली पॉलीथीन में शव लपेट दिए गए. इसी में 10 घायलों को बैठा दिया गया. बिना यह सोचे कि 27-28 घंटे पुराने शवों के बीच ये 800 किलोमीटर लंबा सफर कैसे तय करेंगे.

औरैया प्रशासन की संवेदनहीनता से जुड़ी ये तस्वीर के सामने आने के बाद सरकार भी बैकफुट पर आ गई है. इस घटना के बाद आनन फानन में शव वाहन का इंतजाम किया गया और जख्मी मजदूरों को एंबुलेंस से भेजने का इंतजाम किया गया. दरअसल जिन 26 मजदूरों की सड़क हादसे में मौत हुई थी उनमें से 14 मजदूर झारखंड के थे. हादसे में झारखंड के कई मजदूर जख्मी हुए थे. जिन्हें उनके घर भेजने के लिए डीसीएम ट्रक का इंतजाम किया गया. लेकिन औरेया प्रशासन ने इस ट्रक में घायल मजदूरों के साथ उन शवों को भी रख दिया जिन्हें झारखंड भेजना था.

साथ ही इसी ट्रक में उन लोगों के शव भी डाल दिए गए जो मजदूर पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे. 3 अलग अलग ट्रको में 17 शव के साथ मजदूरों को भी भेजा गया था. औरैया से रवाना होने के बाद जब ये सभी ट्रक प्रयागराज पहुंचे तो इस इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना का खुलासा हुआ.

हेमंत सोरेन ने किया ट्वीट

दरअसल यूपी सरकार की इस करतूत का खुलासा खुद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था. उन्होंने एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यूपी सरकार की संदवेदनहीनता पर सवाल उठाया था और झारखंड के मजदूरों को सम्मान के साथ वापस भेजने की मांग की थी.

इस ट्वीट के बाद यूपी सरकार हरकत में आई और प्रयागराज में मजदूरों और शवों को घर तक पहुंचाने का अलग अलग इंतजाम किया गया. हालांकि इस प्रक्रिया में भी प्रशासन को 5 घंटे का समय लग गया उसके बाद घायल मजदूरों को एंबुलेंस और मृतकों को शव वाहन से भेजा गया.

एसपी सुनीति ने चेकिंग में लापरवाही के लिए उपनिरीक्षक रामजीत सिंह, मुख्य आरक्षी पुनूलाल व शिवपाल, आरक्षी विजय सिंह, प्रवीण कुमार, शेखर, सिद्धार्थ व अंशू को निलंबित कर दिया है. एएसपी ने जांच रिपोर्ट में कहा था कि थाना अजीतमल स्थित अनंतराम टोल प्लाजा से मजदूर मालवाहनों से आए. पुलिस टीम ने कोई ध्यान नहीं दिया. एसपी ने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है. वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर इंदिरापुरम, कोसीकलां व फतेहपुर सीकरी थाने के इंस्पेक्टर पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं.

शवों को घायल मजदूरों के साथ भेजने की ये घिनौनी हरकत पूरे सिस्टम पर तमाचा है. जिसके तहत ये दावा किया जा रहा है कि सरकारें मजदूरों को सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं. पूरे देश में अभी मजदूर सड़कों पर हैं और घर वापसी की जद्दोजहद कर रहे हैं. इसी कोशिश में अब तक सैंकड़ों मजदूरों की जान भी जा चुकी है. ऐसे में औरैया प्रशासन की ये हरकता बहुत शर्मिंदा करने वाली है.

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