जामिया के मंच से अनुराग कश्यप: प्यार और अहिंसा की भाषा उन्हें समझ में नहीं आती

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने बीते शुक्रवार को जामिया में चल रहे सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए और प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया।

छात्रों को संबोधित करते हुए अनुराग कश्यप ने कहा, ” ये आंदोलन जामिया से निकला आंदोलन है। यहाँ से JNU पंहुचा और फिर पूरे देश में फैल गया, लेकिन इतने सारे लोग एक साथ इकट्ठा होकर जो बाहर आये हैं. पहली बार लग रहा है की हम लोग एक देश हैं, एक भारतवर्ष हैं।”

अपने भाषण में उन्होंने प्रदर्शन को अहिंसक बनाये रखने की बात कही और धैर्य से काम लेने की बात करते हुए कहा, “हमें अपना संविधान अपना देश वापस लेने ज़रुरत है. और ऐसे ही सड़क पर आके बिना हिंसा के होगा। वो कितना भी उकसाये, और ये बहुत लम्बी लड़ाई है. ये लड़ाई कल ख़त्म नहीं होगी, परसों नहीं होगी, अगले चुनाव के बाद ख़त्म नहीं होगी। ये बहुत लम्बी लड़ाई है।और इसके लिए बहुत धैर्य चाहिए”।

“आप लोग बस जमे रहिये और वो कितना भी आपको उकसाये, आप पर ऊँगली उठाये, आप मुस्कुरा कर बस जमे रहिये क्योंकि उनको सबसे ज़्यादा डर इसी बात से लगता है की आप उग्र क्यों नहीं हो रहे. क्योंकि हिंसा की भाषा उन्हें समझ में आती है। जब आप हिंसक होते हैं तो वो भी हिंसा से जवाब देते हैं. लेकिन प्यार और अहिंसा की भाषा उन्हें समझ में नहीं आती।”

अनुराग कश्यप बॉलीवुड में फिल्म निर्माता, लेखक और एडिटर है. सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सरकार के ख़िलाफ़ बोलने वालो में से एक हैं और शुरू से ही सीएए के खिलाफ रहे हैं.

पब्लिक व्यू डेस्क

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