dalit women killed by upper caste villagers

उत्तर प्रदेश: 8 महीने की गर्भवती दलित महिला की गाँव के उच्च जाति के लोगों ने की हत्या

उत्तर प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचार का मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहा. एक ऐसी ही खबर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से आ रही है. जहां एक एक आठ महीने की गर्भवती दलित महिला को कथित तौर पर एक उच्च जाति की महिला और उसके बेटे द्वारा इतना मारा गया कि उसकी मौत हो गई. बाहरी चोट ना होने की वजह से स्थानीय जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला की ठीक तरीकें से जाँच नहीं की. जिसके बाद आतंरिक चोटों की वजह से महिला की मृत्यु हो गई. इसके साथ ही महिला के गर्भ में पल रहा आठ महीनें का बच्चा भी मर गया.

द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, बुलंदशहर के खेतलपुर भंसोली गाँव की निवासी सावित्री देवी अपने गाँव के ही उच्च-जाति के घरों के बाहर कचरा उठाकर महीने में 100 रुपए तक कमा लेती थी. वहां खड़े प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह 18 अक्टूबर को हमेशा की तरह अपना काम कर रही थी, लेकिन अचानक संतुलन खोने के कारण महिला ने खुद को संभालने के लिए पास में रखी बाल्टी का सहारा ले लिया. जिसके बाद उस घर के बाहर बैठी महिला अंजू जो उच्च जाति की थी बाहर निकल गई. बता दें कि सावित्री अंजू के यहां काम नहीं करती थी. अंजू दलित महिला के अपनी बाल्टी को छूने के कारण बदहवास हो बाल्टी खराब करने की बात कह गर्भवती महिला के पेट पर मुक्के बरसाने लगी. साथ ही उसने उसके सिर को दीवार से टकरा दिया, जिसके बाद उसके बेटे रोहित ने भी सावित्री के साथ मारपीट की.

जिस वक्त ये घटना हुई उस वक्त सावित्री की 9 वर्षीय बेटी भी उसके साथ थी. जो मदद लेने के लिए दलित बस्ती में भाग गई और उसे बचाने में कामयाब रही. बाद में उसी दिन, सावित्री का पति पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने गया, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की. जिसका कारण पुलिस ने महिला को बाहरी चोट ना होना बताया. पुलिस ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने दो दिन बाद इलाके में जाकर शिकायत की और चश्मदीद गवाहों से बात की. इस बीच अस्पताल ने सावित्री को बाहरी चोट ना होने के कारण वापस भेज दिया था. इसके बाद 21 अक्टूबर को सावित्री ज्यादा दर्द होने की वजह से बेहोश हो गई. बाद में उसे उसी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

आपको बता दें कि अंजू और उसका बेटा दोनों ही फरार हैं.

इस घटना से दो महीनें पहले उत्तर प्रदेश में एक और दलित महिला के लिंचिंग हुई थी. आगरा में, 62 वर्षीय मान देवी को इस संदेह पर मार दिया गया था कि वह एक ‘चुड़ैल’ थी, जो गाँव और आस-पास के इलाकों में महिलाओं के बाल काट रही थी.

साथ ही इसी महीने, उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक 14 वर्षीय दलित लड़की की नग्न लाश मिली थी. उसके साथ बलात्कार हुआ था और उसका गला कटा हुआ था, साथ ही उसके शरीर के पास शराब के पाउच मिले थे.

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