leprosy

भारत में दुनियाभर के 50 प्रतिशत कुष्ठ रोग के मामले पाए जाते है

विश्व स्वास्थय संगठन WHO  ने कुष्ठ रोगीयों पर एक नई रिपोर्ट शुक्रवार को निकाली हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में कुष्ठ रोगी के यानी ‘लेप्रोसी’ के करीब दो लाख मामले हर साल दर्ज होते है और इनमें से आधेसे ज्यादा मामले भारत में पाए जाते है.

WHO के मुताबिक भारत जैसे देश मे इस बीमारी को खत्म करने की राह में 3 सबसे बड़ी बाधाएं हैं. सबसे पहली और सबसे बड़ी बाधा इसमें ये है कि भारत मे कुष्ठ रोग को एक धब्बे कि तरह माना जाता है. दूसरी बाधा इसमें यह है कि इसे लेकर पहले से लोगों के मन में पूर्वाग्रह है और तीसरी वजह भारत में कुष्ठ रोगीयों के साथ किया जाना वाला भेदभाव का व्यवहार है. जिसके कारण कुष्ठ के रोगीयों को बहुत परेशीनियों का सामना करना पड़ता है.

WHO के दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय निदेशक पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने कुष्ठ रोगीयों से जुड़े दो कानूनों को निरस्त करने के लिए भारत कि सराहना की. निरस्त किए गए इन कानूनो में कुष्ठ से पीड़ित लोगों के खिलाफ भेदभाव और दूसरा तलाक लेने के लिए कुष्ठ रोग को वैध आधार मानने का है. उनका कहना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्र, उप सहारा अफ्रीका, ब्राजील और प्रशांत इलाके में कुष्ठ रोगियों की तादाद बहुत ज्यादा है.

पूनम सिंह ने बताया कि स्वस्थ होने के लिए और कुष्ठ रोग को समाप्त करने की राह में भारत में कुष्ठ संबंधी भेदभाव, लांछन, कलंक और पूर्वाग्रह सबसे प्रमुख बाधाएं है. उनका कहना है कि अगर इस बीमारी की शुरुआत में ही इसका पता लग जाए तो इसका 100 प्रतिशत इलाज संभव है. उन्होंने आगे बताया कि दुनिया भर में कुष्ठ रोग क् मामले दिन पर दिन कम होते जा रहे है लेकिन भारत में इस बीमारी के मामले बढ़ते जा रहे है. दुनियाभर में हर साल कुष्ठ रोग के 2 लाख मामले सामने आ रहे है जिसमें से 50 प्रतिशत मतलब एक लाख कुष्ठ रोगी के मरीज सिर्फ भारत में है.

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