महाराष्ट्र की जोड़-तोड़ की राजनीति के बीच 300 किसानों ने खुदकुशी की

राजनेता कहते हैं कि उनके लिए किसान और उनकी जरूरतें सबसे ऊपर हैं. लेकिन सच शायद इससे बिल्कुल ही अलग है. राजनीति और राजनेताओं के लिए सत्ता हमेशा से सबसे ऊपर रही है. किसानों की कर्जमाफी कर महाराष्ट्र सरकार वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है. लेकिन बहुत बड़ा सच ये है कि राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में तीन सौ किसानों ने खुदकुशी कर ली.

300 किसानों ने जान दी

अगर राजनेताओं के लिए सत्ता सबसे ऊपर ना होती तो ऐसा न होता. महाराष्ट्र के राजनीतिक दल सत्ता के लिए सिर-फुटौव्वल कर रहे थे तो उसी दौरान 300 किसानों ने अपनी जान दे दी. बेमौसाम बरसात और
औले पड़ने से फसलें तबाह हो गई.

वैसे तो महाराष्ट्र किसानों की आत्महत्या के लिए बदनाम रहा है. लेकिन राज्य में इतने कम समय में इतनी ज्यादा संख्या में किसानों की खुदकुशी पिछले चार साल में इससे पहले कभी नहीं हुई. इसका मुख्य कारण यह है कि जब मौसम की मार से किसानों की 70 प्रतिशत तक फसल चौपट हो चुकी थी, तब पार्टियां अपनी ही धुन में मस्त थीं. इस जोड़-तोड़ की राजनीति करते हुए नेताओं को पता ही नहीं चला कि राज्य का अन्नदाता टूटकर बिखर रहा है और मौसम की मार की वजह से अपनी जान तक दे रहा है.

मराठवाड़ा में 120 किसानों की खुदकुशी

सबसे ज्यादा आत्महत्या की घटनाएं मराठवाड़ा इलाके में हुई. इस दौरान यहां 120 किसानों ने जान दे दी. जबकि विदर्भ में खुदकुशी के 112 मामले सामने आए. अमरावती में ओलावृष्टि से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए है. ओलावृष्टि को कारण कपास समेत गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है. जिले में पिछले तीन दिनों से कई जगहों पर बारिश हो रही है.

ओलावृष्टि और बारिश की दोहरी मार

इसके साथ ही नागपुर के इसपूर, झिपला, बोरी, मेंडकी, चिखली, गोधनी, अवकाली में ओलावृष्टि और बारिश की दोहरी मार के कारण संतरे, गेहूं, चना और कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है. वहीं वाशिम जिले में भी यही हाल है, बारिश की वजह से खरीफ की फसलें नष्ट हो गई है. साथ ही यहां सोयाबीन को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है.

राजनीति में एक-दूसरे पर किसानों की अनदेखी के खूब आरोप लगाए जाते हैं. लेकिन किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान पर शायद ही ठोस काम हो पाता है. ले-देकर हर बार कर्जमाफी का राजनीतिक हथियार जरूर निकाल लिया जाता है. किसानों को इसका लाभ मिले या न मिले राजनीतिक पार्टियों को वोट का फायदा जरूर मिल जाता है.

पब्लिक व्यू डेस्क

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