29 Indian soldiers martyred

गलवान घाटी में चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद

पूर्वी लद्दाख में गालवन घाटी में भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच सोमवार रात को हिंसक झड़प हुई. इस झड़प में भारत के कई सैनिकों ने अपनी जान गंवाई. खबर आ रही है कि इस झड़प में कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए है. यह झड़प भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लद्दाख में 14 हजार फीट ऊंची गालवन वैली में हुई. गालवन वैली वही इलाका है, जहां 1962 की जंग में 33 भारतीयों की जान गई थी.

बता दें कि, पिछले काफी समय से यहां तनाव का माहौल था. साथ ही बॉर्डर पर तनाव कम करने के लिए अधीकारियों की बैठक भी चल रही थी. लेकिन, इसी बीच जब भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को LAC से पीछे हटने को कहा तो ये झड़प हुई.

भारतीय सेना की तरफ से दिए गए बयान में कहा गया, “भारतीय और चीनी सैनिकों की झड़प में 17 जवान जो वहां स्टैंड ऑफ लोकेशन पर थे वो गंभीर रूप से घायल हुए. इसके बाद गंभीर चोटों और शून्य तापमान की वजह से शहीद हो गए. अबतक 20 जवान इस झड़प में शहीद हो चुके हैं. “

साथ ही आपको बता दें कि, चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से आए बयान में चीन ने भारत से कहा कि भारत अपने सैनिक को सख्ती से रोके.

देश ने 20 सैनिकों को खो दिया

इस झड़प में भारत ने कर्नल रैंक के कमांडिंग ऑफिसर और 19 जवानों को खो दिया. बता दें कि, इनमें से सिर्फ तीन के नाम सेना ने आधिकारिक तौर पर बताए हैं. जिनमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू, हवलदार पालानी और सिपाही कुंदन झा शामिल हैं. बाकी जवानों की कोई ऑफइशियल जानकारी अबतक सामने नहीं आई है. इसके साथ ही चीन की तरफ से भी 3 से 5 सैनिकों के मारे जाने और 11 जवानों के घायल होने की खबर है, लेकिन अबतक चीन ने यह कबूला नहीं है.

वहीं इस घटना के लिए भारतीय सैनिकों पर एलएसी का अतिक्रमण करने के चीन के आरोपों को भारत ने खारिज किया. साथ ही साफ कर दिया कि तनाव घटाने के लिए वह बातचीत को राजी है मगर चीन की ऐसी हरकतों का भी भारत जवाब देगा. बता दें कि इस घटना के बाद मंगलवार सुबह 7:30 बजे चीन ने भारत से बातचीत के लिए पहल की थी.

बता दें कि, इससे पहले 20 अक्टूबर 1975 को अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में असम राइफल की पैट्रोलिंग पार्टी पर एम्बुश लगाकर हमला किया गया था. इसमें भारत के 4 जवान शहीद हुए थे. जिसके 45 साल बाद चीन बॉर्डर पर हमारे सैनिकों की शहादत हुई है.

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