रेलवे ट्रैक पर सो रहे 16 प्रवासी मजदूरों के ऊपर से गुजरी मालगाड़ी

महाराष्ट्र से 360 किलोमीटर दूर औरंगाबाद से आज सुबह-सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. 16 प्रवासी मजदूरों की मालगाड़ी के नीचे कटने की वजह से मौंत हो गई. जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से जख्मी हैं. बताया जा रहा है कि करीब 36 किलोमीटर पैदल चलने के बाद वे रेल की पटरी पर आराम करने के लिए लेट गए. ये सभी मजदूर पटरी के सहारे जालना से भुसावल की ओर पैदल अपने घर (मध्य प्रदेश) लौट रहे थे. बताया जा रहा है कि पहले ये सभी सड़क के रास्ते आ रहे थे लेकिन औरंगाबाद के पास आते हुए इन्होंने रेलवे ट्रैक के साथ चलना शुरू किया. ज्यादा चलने की वजह से थकान के कारण सभी आराम करने लगे और वहीं सो गए. सुबह सवा पांच बजे एक ट्रेन वहां से गुजरी. और नींद में होने के कारण मजदूरों को संभलने का भी मौका नहीं मिला और ये लोग ट्रेन की चपेट में आ गए.

भारतीय रेलवे की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जिन मजदूरों की मौत हुई है. वो सभी मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और महाराष्ट्र के जालना में एसआरजी कंपनी में काम करते थे. 5 मई को इन सभी मजदूरों ने जालना से अपना सफर शुरू किया था. रेलवे ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं. बताया जा रहा है कि घटना के समय इलाके में चीख-पुकार मच गई. साथ ही मजदूरों को ट्रैक पर देखने के बाद लोको पायलट ने मालगाड़ी को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन फिर भी सही समय पर ट्रेन नहीं रुक पाई. जिसके कारण ये हादसा हुआ. घटना में घायल लोगों का औरंगाबाद के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने घटना में मारे लोगों के प्रति दुख जताया है. पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल हादसे में जानमाल के नुकसान से बेहद दुखी हूं. रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल से बात कर चुका हूं और वह स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. हर संभव मदद दी जा रही है.’

वहीं केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करते हुए कहा, “आज 5:22 AM पर नांदेड़ डिवीजन के बदनापुर व करमाड स्टेशन के बीच सोये हुए श्रमिकों के मालगाड़ी के नीचे आने का दुखद समाचार मिला. राहत कार्य जारी है, व इन्क्वायरी के आदेश दिये गए हैं. दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करता हूं.”

अब ये बात समझने वाली है कि जब कई राज्यों ने अपने-अपने राज्यों के मजदूरों व कामगारों को वापस लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं. और यह ट्रेनें अन्य राज्यों में फंसे हुए लोगों को उनके राज्य तक पहुंचा रही हैं. तो इसके बावजूद लोगों के अपने राज्य पैदल जाने का सिलसिला क्यों नहीं थम रहा है? हर दिन इस तरह की खबरें लगातार आ रही है कि काफी संख्या में लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर पैदल अपने राज्य की ओर लौट रहे हैं. तो अगर राज्य ट्रेन और बस की सुविधा दे रही है तो मजदूर वर्ग क्यों मजबूर है पैदल जाने को?

एक तरफ कोरोना वायरस का कहर, लॉकडाउन की आफत और रोजगार के ठप होने की मार. तो दूसरी तरफ परिवार का पेट भरने चिंता ऐसे में सबसे ज्यादा इन सब का शिकार गरीब मजदूरों को ही होना पड़ा है.

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